राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025 (raashtreey sahakaaree neeti 2025)



():-    राष्‍ट्रीय सहकारिता नीति में 16 उद्देश्‍य/लक्ष्‍य हैं जिनमें से कुछ निम्‍नानुसार हैं:

  1. समयबद्ध सुधारों के माध्‍यम से अनुकूल विधिक और विनियामक माहौल निर्मित करके सहकारी समितियों में स्‍वायत्ततापारदर्शितासुगम व्‍यवसाय और सुशासन को बढ़ावा देना और उन्‍हें समान अवसर प्रदान करना ।
  2. अन्‍य आर्थिक संस्‍थानों की ही तरह उन्‍हें सुगम और किफायती वित्त तथा समान व्‍यावसायिक अवसर प्रदान करना ।
  3. अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच सहित बहुआयामी विस्तार को प्रोत्साहित करना तथा सदस्यों की आय में वृद्धि करना।
  4. प्रभावशाली और पारदर्शी प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाना।
  5. सहकारी समितियों को सहकारी सिद्धांतों पर आधारित पेशेवर-प्रबंधित आर्थिक इकाइयों में रूपांतरित होने में सहयोग करना।
  6. नए और उभरते क्षेत्रों में सहकारी समितियों के विस्तार को प्रोत्साहित करना ।
  7. सततता (sustainabilityहेतु पर्यावरण-अनुकूल आचरणों और चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economyको प्रोत्साहित करना।
  8. मानकीकृतउच्च-कोटिसहकार-केंद्रित पाठ्यक्रमों के विकास को प्रोत्साहित करना और प्राधिकृत विषयवस्तु का निर्माण करना 

प्रमुख उपलब्धियां निम्‍नानुसार हैं:

  1. शहरी सहकारी बैंकों के लिए एनयूसीएफडीसी (नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट ऑफ कॉरपोरेशन लिमिटेड) के नाम से अंब्रेला संगठन की स्‍थापना । इसे भारतीय रिजर्व बैंक से एसआरओ (सेल्‍फ रेगुलेटरी संगठन) का दर्जा भी प्राप्‍त हो गया है ।
  2. ग्रामीण सहकारी बैंकों (राज्‍य सहकारी बैंकों और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों) को डिजिटल बैंकिंग के लिए आईटी इन्‍फ्रा सेवाएं प्रदान करने के लिए सहकारी सारथी लिमिटेड नामक इकाई की स्‍थापना  ।
  3. उच्‍च कोटिमानकीकृत और उद्योग चालित शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करने और भारत में सहकारी शिक्षा एवं प्रशिक्षण हेतु शीर्ष स्‍तरीय संगठन के रूप में कार्य करने के लिए त्रिभुवन” सहकारी विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना ।
  4. अंतर्राष्‍ट्रीय बाजारों में सहकारी क्षेत्र के उत्‍पादों के निर्यात को प्रोत्‍साहित करने के लिए राष्‍ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) की स्‍थापना ।
  5. भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) के नाम से एक सहकारी संगठन की स्‍थापना जो सभी दोनों पीढ़ियों के बीजोंअर्थात् बुनियादी और प्रमाणित बीजों के उत्‍पादनपरीक्षणप्रमाणनप्रसंस्‍करणभंडारणब्रांडिंगलेबलिंग और पैकेजिंग पर ध्‍यान केंद्रित करेगा ।  
  6. जैविक उत्‍पादों के संग्रहणप्रमाणनपरीक्षणप्रापणभंडारणप्रसंस्‍करणब्रांडिंगलेबलिंगपैकेजिंगलॉजिस्टिक सुविधाएं एवं विपणन में संस्‍थागत सहायता प्रदान करने तथा जैविक खेती करने वाले किसानों को वित्तीय सहायता की व्‍यवस्‍था में सुविधा प्रदान करने के लिए अंब्रेला संगठन के रूप में राष्‍ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्‍स लिमिटेड (एनसीओएल) की स्‍थापना ।
  7. मंत्रालय द्वारा स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभागभारत सरकार से अनुनय के परिणामस्‍वरूप एनसीईआरटी द्वारा कक्षा 6 के छात्रों के लिए सहकारिता पर एक अध्‍याय शामिल किया गया है ।
  8. लक्षित इंटरवेंशंस के लिए मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया राष्‍ट्रीय सहकारी डेटाबेस में लैंगिक और दुर्बल वर्ग के आंकड़ों का पृथक्‍करण ।
  9. ऐप आधारित टैक्‍सी सेवा - “भारत टैक्‍सी का शुभारंभ ।
  10. सुशासन और पारदर्शिता को सुविधाजनक बनाने के लिए बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 का वर्ष 2023 में संशोधन ।
  11. डेयरी सेक्‍टर में संधारणीयता और चक्रीयता के लिए कोऑपरेटिव इनपुट्स एंड सर्विस डिलीवरी मल्‍टी स्‍टेट लिमिटेड के नाम से एक बहुराज्‍य सहकारी समिति को दिनांक 31.12.2025 को पंजीकृत किया गया।  इस समिति का लक्ष्‍य किफायतीगुणवत्तापूर्ण निविष्टियां और अनिवार्य सहायक सेवाओं की समयबद्धता सुनिश्चित करके डेयरी पशुओं की उत्‍पादकता में वृद्धि और डेयरी किसानों की लाभप्रदता में सुधार करना है। गोमाय सहकारी समिति मल्‍टी-स्‍टेड लिमिटेड के नाम से एक अन्‍य बहुराज्‍य सहकारी समिति को भी दिनांक 31.12.2025 को पंजीकृत किया गया है । इस समिति का लक्ष्‍य नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्‍यों और जैविक उर्वरकों के संधारणीय उपयोग का समर्थन करते हुए ऐसी खाद प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देना है जो ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार और आय के अवसर उत्‍पन्‍न करें ।  

():-    सरकार ने वर्ष 2022 में पैक्‍स कंप्‍यूटरीकरण की केंद्रीय क्षेत्रक परियोजना को लॉन्‍च किया था । इस परियोजना के अधीन भारत सरकार ने आरंभ में  ₹2,516 करोड़ के कुल वित्तीय परिव्‍यय से 63,000 को अनुमोदित किया था, जिसे अब बढ़ाकर 2925.39 करोड़ रुपये करते हुए 79,630 पैक्‍स को शामिल किया गया है जिसमें सभी कार्यशील पैक्‍स को ईआरपी (एंटरप्राइज रिसोर्स प्‍लानिंग) आधारित कॉमन राष्‍ट्रीय सॉफ्टवेयर पर लाकर राज्‍य सहकारी बैंकों (StCBs) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs)के माध्‍यम से नाबार्ड के साथ लिंक किया जाना है । पैक्‍स कंप्‍यूटरीकरण परियोजना के अधीन कुल 79,630 प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्‍स) को शामिल किया गया है जिनमें से 61,478 प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्‍स) को कंप्‍यूटरीकृत करके एंटरप्राइज रिसोर्स प्‍लानिंग (ईआरपी) पर ऑनबोर्ड किया गया है जिससे वे ऑनालाइन लेखाकरण और सदस्‍य सेवाएं अपनाने में सक्षम बन गए हैं ।

मंत्रालय द्वारा पैक्‍स कंप्‍यूटरीकरण परियोजना के अधीन जारी केंद्रीय सहायता की कुल धनराशि 1073.98 करोड़ रुपये है जिसमें से प्रतिभागी राज्‍यों/संघ राज्‍यक्षेत्रों को 908.06 करोड़ रुपये और नाबार्ड को परियोजना के अधीन कार्यान्‍वयन एजेंसी के रूप में 165.92 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं ।

अनुमान है कि डिजिटल एकीकरण से ग्रामीण सेवा प्रदाय में निम्‍नानुसार तरीकों से उल्‍लेखनीय वृद्धि होगी:

    • पारदर्शिता और कुशलता: डिजिटल अभिलेख त्रुटियां घटाता है और लेनदेन एवं सेवा प्रदायगी की जवाबदेही में सुधार लाता है ।
    • बहु-व्‍यवसाय के साथ बेहतर पहुंचकिसानों को एकल प्‍लेटफॉर्म पर क्रेडिटनिविष्टिपीडीएस, सीएससी और अन्‍य विपणन सुविधाएं जैसी बहु-सेवाओं की पहुंच मिलती है जिससे बिचौलियों पर निर्भरता घटती है ।
    • रियल टाइम निगरानी: जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) और राज्‍य सहकारी बैंकों (SCBs) के साथ सीबीएस एकीकरण से रियल टाइम वित्तीय रिपोर्टिंग और बेहतर विनियामक पर्यवेक्षण सुनिश्चित होता है ।  
    • वित्तीय समावेशन: डिजिटल प्‍लेटफॉर्म्‍स प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण (DBT), क्रेडिट और ऋण संवितरण और मोबाइल आधारित लेनदेनों में सुविधा प्रदान करते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय पहुंच में सुधार लाते हैं।
    • डाटा-चालित निर्णयनडिजिटलीकरण से फसल पद्धतिक्रेडिट उपयोग और मांग रूझानों में अंतर्दृष्टि प्राप्‍त होती है जिससे बेहतर आयोजना और सहायता प्रणालियां सक्षम होती हैं ।

(), (और ():-        सहकारिता मंत्रालय रोजगार सृजनसामाजिक सुरक्षा और जमीनी स्तर पर आर्थिक भागीदारी के साधन के रूप में सहकारी समितियों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत टैक्सी की परिकल्पना चालकोंजिन्‍हें सारथी के रूप में संदर्भित किया गया हैको स्वामित्वशासन और मूल्य निर्माण के केंद्र में रखकर मोबिलिटी के क्षेत्र में एक रूपांतरणकारी पहल के रूप में की गई है जिससे एग्रीगेटर-चालित मॉडल के लिए एक संधारणीय और सम्मानजनक विकल्प प्रदान किया जा सके । "भारत टैक्सी" भारत का पहला सहकारिता आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है । यह 'सहकार से समृद्धि' की परिकल्‍पना के अनुरूप सहकारी क्षेत्र को सशक्‍त करने और समावेशीनागरिक-केंद्रित मोबिलिटी समाधानों को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के चल रहे प्रयासों में एक प्रमुख मील का पत्थर है । बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के अधीन पंजीकृत भारत टैक्सी की स्थापना दिनांक जून 2025 को सहकारिता के क्षेत्र में कार्यरत राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों द्वारा की गई थी । यह प्लेटफॉर्म शून्य-कमीशन मॉडल पर काम करता है जिसमें चालकों को मुनाफे का सीधा वितरण होता है जो निवेश-चालित एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म का एक घरेलू और स्वदेशी विकल्प प्रदान करता है 

अभी तक भारत टैक्सी सेवा दिल्ली एनसीआर-दिल्लीगुरुग्रामनोएडा और गुजरात के अहमदाबादराजकोटसोमनाथ और द्वारका में कार्यशील है । ऐप में 990,082 पंजीकृत ग्राहक हैं और 3 लाख से अधिक पंजीकृत चालक हैं जो 291,665 राइड पूरी कर चुके हैं ।

(और ():    मांग और बाजार की स्थिति पर इसका विस्‍तार अन्‍य क्षेत्रों में किया जाएगा ।

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